31 July 2007

जुदाई

हाय ये लंबी जुदाई
हर पल की ये तनहाई
ढ़्ढ़ूँ तुम्हे अब कहां
पूंछू कीसे अब तू कहां


पाय्रे तेरे वो मीठे बोल
गूंगे अब ये दीन मेरे
तनहाई भरी सूनी राते
तडफाये तो कन्हु कीसको

संग जीने मरने की कसमे
तोडी तुने बीन पूछे, समझे
जलाती तेरी बेरहम यादे
जलाऊ तू जलती नही यादे

चुप चुप सी ये ज़ींदगी
खामोश लवो की कहानी
गीली गीली ये अब आंखे
छूपाऊं भी तू कैसे............................

कीर्ती वैध्या

4 comments:

Rajat Narula said...

I realy liked your blog, its interesting an refereshing...

Rajat Narula said...

I realy like the blog , its interesting...

Rajat Narula said...

i realy liked the blog, nice refreshing and interesting.

Anonymous said...

Nu ya - ugnis!